विवाहेतर संबंधों का सबसे गंदा सच! 5 चौंकाने वाली वजहें
भारतीय समाज में शादी को सात जन्मों का बंधन माना जाता है। लेकिन हकीकत में आज लाखों घरों में यह बंधन चुपके-चुपके टूट रहा है। सर्वे बताते हैं कि 55% से ज्यादा शादीशुदा भारतीयों ने कभी न कभी अपने पार्टनर को धोखा दिया है। Gleeden जैसे एक्स्ट्रा-मैरिटल डेटिंग ऐप्स पर भारत में यूजर्स की संख्या तेजी से बढ़ी है, और महिलाओं में यह ट्रेंड पुरुषों से भी ज्यादा तेज है। 77% महिलाएं बोरियत को मुख्य वजह बताती हैं। लेकिन सवाल यह है – आखिर क्यों? क्या शादी के बाद प्यार सच में खत्म हो जाता है, या कुछ और गहरा सच है जो हम सब अनदेखा कर देते हैं?
इन संबंधों के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं, टूटे परिवार, बच्चों पर पड़ने वाला बुरा प्रभाव और जीवन भर का पछतावा, ये कुछ ऐसी चीजें हैं जिनका सामना करना पड़ सकता है. फिर भी, कई लोग इन संबंधों की तरफ आकर्षित क्यों होते हैं?
यह पोस्ट विवाहेतर संबंधों के सबसे गंदे सच को उजागर करने वाला है। हम 5 ऐसी चौंकाने वाली वजहें देखेंगे जो आमतौर पर छिपी रहती हैं, लेकिन ये घर-घर में फैल रही हैं।
1. अरेंज मैरिज का दबाव और रिग्रेट (Regret from Arranged Marriages)
भारत में 90% से ज्यादा शादियां अरेंज होती हैं। परिवार, समाज, जाति, आर्थिक स्थिति – प्यार आखिरी नंबर पर आता है। कई लोग 20-25 की उम्र में शादी कर लेते हैं, बिना “फील्ड प्ले” किए। बाद में रिग्रेट होता है – “मैंने जिंदगी नहीं जी ली”।
यह रिग्रेट विवाहेतर संबंधों में बदल जाता है। पुरुष और महिलाएं दोनों “खोया हुआ समय” वापस लेना चाहते हैं। सर्वे में कई लोग कहते हैं कि वे अफेयर इसलिए करते हैं क्योंकि शादी में “एक्साइटमेंट” कभी था ही नहीं।
गंदा सच – जब शादी “ड्यूटी” से होती है, तो प्यार बाहर ढूंढना पड़ता है। और समाज इसे छिपाने में माहिर है।
2. बदलती ज़रूरतें और भावनात्मक उपेक्षा
शादी के कुछ साल बाद सबसे बड़ा सच सामने आता है – पति-पत्नी साथ तो रहते हैं, लेकिन दिल से दूर हो चुके होते हैं। बातचीत सिर्फ बच्चों, बिलों, रिश्तेदारों तक सीमित हो जाती है। कोई रोमांटिक बात नहीं, कोई गहरी बातचीत नहीं, कोई सपोर्ट नहीं।
सर्वे में 90% से ज्यादा महिलाएं कहती हैं कि वे भावनात्मक रूप से उपेक्षित महसूस करती हैं। पुरुष भी यही शिकायत करते हैं। जब घर में कोई आपकी भावनाओं को समझने वाला नहीं होता, तो बाहर कोई मिल जाता है जो सुनता है, समझता है, तारीफ करता है। सोशल मीडिया पर एक “लाइक” या मैसेज से शुरू होता है, और धीरे-धीरे भावनात्मक अफेयर बन जाता है।
यह गंदा सच है क्योंकि हम इसे “सामान्य” मान लेते हैं। “शादी के बाद तो ऐसा ही होता है” – यह लाइन लाखों घरों में सुनाई देती है। लेकिन यही भावनात्मक खालीपन विवाहेतर संबंधों का सबसे बड़ा ट्रिगर है। अगर आपका पार्टनर आपको “दोस्त” की तरह ट्रीट नहीं करता, तो कोई और कर लेगा।
3. शारीरिक असंतोष – बिस्तर ठंडा होने का सच (Sexual Dissatisfaction)
भारतीय समाज में सेक्स पर खुलकर बात नहीं होती। शादी के बाद कई जोड़े इसे “ड्यूटी” समझने लगते हैं। एकरसता, थकान, बच्चों की जिम्मेदारी – सब कुछ सेक्स लाइफ को मार देता है।
सर्वे बताते हैं कि 77% महिलाएं बोरियत और मोनोटनी को वजह बताती हैं। पुरुषों में भी यही हाल है – कई बार पत्नी से इंटीमेसी नहीं मिलती, तो बाहर ढूंढते हैं। कुछ मामलों में सेक्सुअल इनकम्पेटिबिलिटी (जैसे अलग-अलग डिजायर लेवल) या स्वास्थ्य समस्याएं भी वजह बनती हैं।
गंदा सच यह है कि जब बिस्तर ठंडा हो जाता है, तो दिल किसी और की ओर चला जाता है। और सबसे चौंकाने वाली बात – कई लोग कहते हैं कि अफेयर सिर्फ “फिजिकल” था, लेकिन असल में यह भावनात्मक खालीपन का नतीजा होता है। सेक्स सिर्फ बहाना है; असली वजह घर में मिलने वाली कमी है।
4. सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स – जाल फैलाने वाला हथियार (Digital Temptation)
यह सबसे नया और सबसे तेज फैलने वाला कारण है। Gleeden जैसे ऐप्स ने भारत में 700% से ज्यादा ग्रोथ दिखाई है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप – पुराने दोस्त, सहकर्मी, यहां तक कि अनजान लोग भी एक क्लिक में उपलब्ध हैं।
एक “हाय” से शुरू होता है, फिर लेट नाइट चैट, फिर मीटिंग। प्राइवेसी, एनॉनिमिटी और आसानी ने अफेयर को इतना आसान बना दिया है कि पहले कभी नहीं था। ऑफिस में लंबे घंटे काम करने वाले लोग सहकर्मियों के साथ ज्यादा समय बिताते हैं, और भावनाएं विकसित हो जाती हैं।
चौंकाने वाली बात – 48% भारतीय मानते हैं कि दो लोगों से एक साथ प्यार किया जा सकता है। सोशल मीडिया ने यह भ्रम पैदा कर दिया है कि “बेहतर” ऑप्शन हमेशा उपलब्ध है। यह गंदा सच है कि आज की तकनीक ने धोखे को घर तक पहुंचा दिया है।
5. अवसर और कमज़ोरियाँ (Avasar aur Kamzoriyaan)
कभी-कभी परिस्थितियां भी विवाहेतर संबंधों को जन्म दे सकती हैं. काम के सिलसिले में लंबी यात्राएं करनी पड़ना, दफ्तर में देर रात तक साथ काम करना, या सोशल मीडिया पर किसी अनजान व्यक्ति से बातचीत शुरू होना – ऐसे मौके नज़दीकियां बढ़ा सकते हैं. अगर वैवाहिक जीवन में पहले से ही दरार है, या किसी पार्टनर में कोई कमी है, तो ऐसे अवसरों पर वे अपनी कमजोरियों के आगे झुक सकते हैं और गलत रास्ते पर चले जा सकते हैं.
इसके अलावा, विवाहेतर संबंधों के कुछ और कारण भी हो सकते हैं, जैसे:
शादी को जल्दबाजी में करना (Shaadi Ko Jaldbazi Mein Karna) – कम उम्र में या बिना समझे शादी कर लेना. ऐसे रिश्तों में प्यार की कमी होती है, जो आगे चलकर विवाहेतर संबंधों का कारण बन सकती है.
माता-पिता का खराब रिश्ता (Mata-Pita Ka खराब रिश्ता) – अगर बचपन में माता-पिता का रिश्ता खराब रहा हो, तो भी व्यक्ति बड़े होकर विवाहेतर संबंधों की तरफ आकर्षित हो सकता है.
मीडिया और समाज का प्रभाव (Midia aur Samaaj Ka Prabhav) – आजकल मीडिया और सिनेमा में भी विवाहेतर संबंधों को कई बार रोमांटिक तरीके से दिखाया जाता है, जिसका युवा पीढ़ी पर गलत प्रभाव पड़ सकता है.
निष्कर्ष
विवाहेतर संबंधों का सबसे गंदा सच यह है कि ये अचानक नहीं होते। ये सालों की छोटी-छोटी दरारों से बनते हैं। भावनात्मक दूरी, शारीरिक असंतोष, तकनीक का दुरुपयोग, गलत वजहों से शादी और बोरियत – ये पांच वजहें घर-घर में मौजूद हैं।
खुलकर बातचीत, काउंसलिंग, समय निकालकर साथ बिताना, रोमांस को जिंदा रखना – ये छोटे कदम बड़े बदलाव ला सकते हैं। अगर आप या कोई जानकार इस जाल में फँसा है, तो मदद लें। शादी टूटने से पहले बचाना आसान है। किसी भी रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है कि पार्टनर आपस में खुलकर बात करें, एक-दूसरे की भावनाओं को समझें और रिश्ते को निभाने की कोशिश करें. समय रहते समस्या का समाधान निकालना ही हर रिश्ते को सफल बनाने का सबसे अच्छा तरीका है.
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